तुलसी के पत्ते से फायदा और नुकसान ( Basil Benefits and Side Effects in Hindi)

तुलसी के पत्ते से क्या क्या फायदा है ?

तुलसी शब्द का अर्थ है “अतुलनीय पौधा”। तुलसी भारत में सबसे पवित्र जड़ी बूटी मानी जाती है और “जड़ी बूटियों की रानी” भी कहलाती है। यह एशिया के दक्षिणी भाग जैसे थाईलैंड, भारत और हिंदू प्रभावित देशों में पाई जाती है। हिन्दू पिछले पाँच हज़ार सालों से तुलसी की सुबह और शाम पूजा करते आए हैं। इसके प्रभावी फायदों के कारण, यह भारत में ही नहीं, दुनिया भर में जानी जाती है।

बारिश के मौसम में, जब सर्दी, बुखार और डेंगू जैसी बीमारियों के संक्रमण फैलते हैं, इसकी पत्तियों का काढ़ा नियमित रूप से पीना शरीर को इन संक्रमणों से बचाता है। बुखार अधिक होने की स्थिति में मरीज़ को तुलसी की पत्तियों को दालचीनी के पाउडर के साथ आधा लीटर पानी में उबालना चाहिए और उसमें गुड़ और थोड़ा दूध मिलाकर मरीज को पिलाना चाहिए। इससे बुखार की तेजी कम हो जाता है।

बुखार के उपचार के लिए

बुखार के उपचार के लिए एक ग्राम तुलसी की पत्तियों को थोड़े अदरक के साथ आधा लीटर पानी में इतना उबालना चाहिए कि पानी की मात्रा घटकर आधी रह जाए तब इस काढ़े को चाय की तरह पीना चाहिए। तुलसी की पत्तियाँ कफ से होने वाली गले की खराबी को ठीक करने में भी लाभदायक होती हैं। तुलसी की पत्तियों को पानी में उबालकर इस पानी को पीने और उससे गरारे करने से गला ठीक हो जाता है।

यौन रोगों के इलाज में

पुरुषों में शारीरिक कमजोरी होने पर तुलसी के बीज का इस्तेमाल काफी फायदेमंद होता है. इसके अलावा यौन-दुर्बलता और नपुंसकता में भी इसके बीज का नियमित इस्तेमाल फायदेमंद रहता है.

अनियमित पीरियड्स की समस्या में

अक्सर महिलाओं को पीरियड्स में अनियमितता की शिकायत हो जाती है. ऐसे में तुलसी के बीज का इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है. मासिक चक्र की अनियमितता को दूर करने के लिए तुलसी के पत्तों का भी नियमित किया जा सकता है.

चेहरे की चमक के लिए

त्वचा संबंधी रोगों में तुलसी खासकर फायदेमंद है. इसके इस्तेमाल सेकील-मुहांसे खत्म हो जाते हैंऔर चेहरा साफ होता है.

चोट लग जाने पर

अगर आपको कहीं चोट लग गई हो तो तुलसी के पत्ते को फिटकरी के साथ मिलाकर लगाने से घाव जल्दी ठीक हो जाता है. तुलसी में एंटी-बैक्टीरियल तत्व होते हैं जो घाव को पकने नहीं देता है. इसके अलावा तुलसी के पत्ते को तेल में मिलाकर लगाने से जलन भी कम होती है

तुलसी के पत्ते को चबाना सही नहीं माना जाता है

दरअसल तुलसी के पत्ते में भारी मात्रा में आयरन और मर्करी पाया जाता है। तुलसी के पत्ते को चबाने पर ये तत्व हमारे मुंह में घुल जाते हैं। ये दोनों ही तत्व हमारे दांतों की सेहत के लिए तथा उनकी सुंदरता के लिए नुकसानदेह हैं। तुलसी थोड़ी अमलीय यानी कि एसिडिक नेचर की होती है, इसलिए रोजाना इसका सेवन दांतों की तकलीफों को दावत दे सकता है। हालांकि तुलसी का ताजा रस मुंह के अल्सर के लिए काफी फायदेमंद होता है लेकिन फिर भी तुलसी के पत्ते को चबाने की इजाजत नहीं दी जाती है।

इस के उपाए!!

तुलसी के इस्तेमाल का सबसे बेहतर तरीका होता है चाय के साथ इसका सेवन करना। तुलसी के पत्ते का उपयोग कर बनाई गई चाय प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करती है और मुंह के जर्म्स से सुरक्षा दिलाने में सहयोग करती है। इसके अलावा यह चेहरे के मुहांसो से भी छुटकारा दिलाती है। ब्लड शुगर के नियंत्रण में भी तुलसी के पत्ते की चाय अहम भूमिका निभाता है। इसके अलावा तुलसी के पत्ते को पानी के साथ निगलकर या फिर इसका काढ़ा बनाकर सेवन किया जा सकता है।

तुलसी नुकसान (साइड इफेक्ट्स)

1 युजीनाल का ओवरडोज:

युजीनाल, तुलसी का प्राथमिक तत्व है। माना जाता है कि तुलसी का अधिक सेवन शरीर में युजीनाल के स्तर को बढ़ा सकता है। युजीनाल का बढता स्तर हमारे शरीर के लिए विषैला साबित हो सकता है। सिगरेट व कुछ फूड फ्लेवरिंग पदार्थों में यूजीनाल पाया जाता है!

लक्षण: खांसी के दौरान खून का आना, तेजी से सांस लेना व पेशाब में खून का आना।

2 खून को पतला करता है:

तुलसी के अधिक सेवन से आपका खून पतला हो सकता है। इसी कारण वालफरिन व हेपरिन जैसी दवाओं को लेने वाले रोगियों को तुलसी का सेवन नहीं करना चाहिए चूंकि तुलसी इन दवाओं में मौजूद खून को पतला करने के गुण की गति को बढा सकती है। यह गति एक बड़ी समस्या का कारण बन सकती है। इसके अलावा, तुलसी को अन्य एंटी-क्लोटिंग दवाओं के साथ भी नहीं लेना चाहिए।

लक्षणचोट लगने पर अधिक खून का बहना तथा शरीर पर नील के निशान।

3 हाइपोग्लाइसीमिया:

हाइपोग्लाइसीमिया एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या है जिसमें रोगी के रक्त शर्करा का स्तर असामान्य रुप से कम हो जाता है। अक्सर, अपने उच्च रक्त शर्करा के स्तर को घटाने के लिए रोगी तुलसी का सेवन करते हैं। अगर मधुमेह व हाइपोग्लाइसीमिया के मरीज दवाओं के साथ तुलसी का सेवन करेंगे तो उनके रक्त शर्करा का स्तर और भी नीचे गिर सकता है। अतः यह बहुत खतरनाक साबित होगा।

लक्षण: अवर्णता, चक्कर आना, भूख लगना, कमजोरी, चिड़चिड़ापन।

4 प्रजनन शक्ति को प्रभावित कर सकता है:

तुलसी के अधिक सेवन से मर्दों की प्रजनन शक्ति प्रभावित हो सकती है। इस तर्क को जांचने के लिए खरगोशों पर एक परीक्षण भी किया गया था। इसके लिए खरगोशों को परीक्षण समूह व सामान्य समूह में विभाजित किया गया। परीक्षण समूहवाले खरगोशों को 30 दिनों के लिए दो ग्राम तुलसी के पत्ते खाने के लिए दिए गए। जिससे परीक्षण समूह के खरगोशों की शुक्राणुओं की संख्या में महत्वपूर्ण घटाव नजर आया।

5 गर्भवती महिलाओं में रिएक्शन:

अगर गर्भावस्था में महिलाएं अधिक तुलसी का सेवन करती है तो इसका प्रभाव मां व बच्चे दोनों पर देखा जा सकता है। तुलसी को खाने से गर्भवती महिलाओं का गर्भाशय सिकुड सकता है। जिससे बच्चे के जन्म के दौरान समस्या पैदा हो सकती है व आगे चल कर मासिक धर्म में मुश्किल हो सकती है। इसके अलावा, तुलसी से गर्भवती महिलाओं को कुछ रिएक्शन होने की भी संभावना है।

लक्षण:   पीठ में दर्द, ऐंठन, दस्त व खून बहना।

6 ड्रग इंटरेक्शन:

तुलसी के सेवन से हमारे शरीर में कुछ दवाओं की प्रक्रिया में बाधाएं पैदा हो सकती हैं। ‘साइटोक्रोम पी450’ – जिगर की एंजाइम प्रणाली का उपयोग करके इस बात को सिद्ध किया जा सकता है। डायजेपाम व स्कॉपॉलामिन दो ऐसी दवाएं हैं जो चिंता, उल्टी, घबराहट को कम करने में मदद करती हैं। लेकिन तुलसी इन दोनों दवाओं के प्रभाव को कम कर सकती है तथा इसके कारण खून में दवाओं के स्तर में वृद्धि या कमी हो सकती है।

लक्षण: सीने में जलन, सिर दर्द व मतली। भले ही प्राकृतिक पदार्थ कई बीमारियों को ठीक करने की क्षमता रखते हों। परंतु, इसका ये मतलब नहीं है कि उसके अधिक सेवन से हमें कोई साइड इफेक्ट्स नहीं होंगे। अतः हमें उनके गुणों व अवगुणों का ज्ञान होना चाहिए।

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